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Maruti Enterprise vs. Union of India & Others

By Batra & Batra Tax Insights · 03 Jun 2026

GST

Maruti Enterprise vs. Union of India & Others

Batra & Batra Tax Insights 03 Jun 2026 1 min read
Maruti Enterprise vs. Union of India & Others

नमस्कार! गुजरात हाई कोर्ट ने Section 16(2)(c) की संवैधानिकता (validity) पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यहाँ इस केस का आसान सारांश (summary) दिया गया है:

Case: Maruti Enterprise vs. Union of India & Others

1. Facts of the Case (मामले के तथ्य)
गुजरात हाई कोर्ट में कई याचिकाओं (petitions) के जरिए CGST Act के Section 16(2)(c) को चुनौती दी गई थी।
यह धारा (section) कहती है कि एक खरीदार (purchaser) को Input Tax Credit (ITC) तभी मिलेगा जब उसके सप्लायर (supplier) ने सरकार को टैक्स जमा कर दिया हो।
Petitioners का कहना था कि अगर सप्लायर टैक्स नहीं भरता, तो इसमें खरीदार की क्या गलती? बिना गलती के ITC रोकना गलत और गैर-संवैधानिक है।

2. Contention of Appellant (अपीलकर्ता के तर्क)
खरीदार के पास यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि सप्लायर ने टैक्स भरा है या नहीं।
एक ईमानदार खरीदार (bona fide purchaser) और धोखाधड़ी करने वाले के बीच अंतर होना चाहिए।
कानून किसी को 'असंभव' (impossible) काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता (Lex non Cogit Ad Impossibilia)।
यह खरीदार के व्यापार करने के अधिकार (Article 19(1)(g)) और समानता के अधिकार (Article 14) का उल्लंघन है।

3. Contention of Respondent (सरकार/विभाग के तर्क)
ITC कोई अधिकार (right) नहीं है, बल्कि कानून द्वारा दी गई एक सुविधा या छूट (concession) है।
टैक्स चेन की शुद्धता बनाए रखने के लिए यह शर्त जरूरी है कि सरकार को पैसा मिले, तभी क्रेडिट दिया जाए।
Section 41(2) और Rule 37A के तहत व्यवस्था है कि अगर सप्लायर बाद में टैक्स भर देता है, तो खरीदार वापस ITC ले सकता है।
अगर बिना टैक्स मिले ITC दिया गया, तो सरकार को भारी राजस्व (revenue) का नुकसान होगा।

4. Conclusion (कोर्ट का निष्कर्ष)
हाई कोर्ट ने Section 16(2)(c) को पूरी तरह सही और संवैधानिक (valid) ठहराया है।
कोर्ट ने कहा कि ITC लेने के लिए Section 16(2) की सभी शर्तें (a से d) एक साथ पूरी होनी चाहिए।
टैक्स कानून में 'समानता' या 'कठिनाई' के आधार पर प्रावधानों को बदला नहीं जा सकता।
हालांकि, कोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया है कि वे ईमानदार खरीदारों की समस्याओं को सुलझाने के लिए एक बेहतर सिस्टम (real-time tracking) विकसित करें ताकि सप्लायर की गलती की सजा खरीदार को न भुगतनी पड़े।

Disclaimer by CA Preetam Batra: Educational Purpose Only

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